रविवार, 27 मई 2012

मैं, तेरे नाम पे......,{गजल}


+++++++ गजल ++++++
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मैं, तेरे नाम पे......, इक सुन्दर सी गजल लिखूँगा,
जानेजाना तुझे मैं....२, इक शायर का ख्वाब लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

अफसराओं को जमीं पर, आने की जरूरत क्या है?
रानी परियों की तुझे मैं...२, मलिकाए हुस्न लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

चाँद सितारों की इस जहाँ को, अब जरूरत क्या है?
नैन सितारों को तेरे मैं...२, मुखड़े को चाँद लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

कब तक यूँ उलझा रहुगां, तेरी इन रेशमी जुल्फों में,
काली नागिन इन्हे मैं...२, सावन की घटा लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

मयखाने जाने की मुझे, अब जरूरत क्या है?
सुर्ख होटों को तेरे मैं...२, छलकते जाम लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

गर खुदा पूछेगा मुझसे, तेरी इबादत का सबब,
मन मन्दिर में तुझे मैं...२, अपने बसा लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,


मौत भी आ जाये मुझे, अब इसकी परवाह क्या है?
अब अपने नाम को मैं...२, तेरे दिल में जिन्दा लिखूँगा !
मैं, तेरे नाम पे......,

मैं, तेरे नाम पे......, इक सुन्दर सी गजल लिखूँगा,
जानेजाना तुझे मैं....२, इक शायर का ख्वाब लिखूँगा !


                  ........यशपाल सिंह “एडवोकेट”
                 लेख तिथि २७-०५-२०१२ ई० 

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